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Ch- 9. His Forever Women

विवेक कुछ पल तक मंजरी को बस देखता रहा। उसकी नजरें झुकी हुई थीं और चेहरे पर शर्म की हल्की-सी लाली साफ दिखाई दे रही थी।
विवेक धीरे से उसके पास आया और उसका हाथ अपने हाथों में थामकर उसे अपनी तरफ खींच लिया। अचानक हुई इस हरकत से मंजरी सीधे उसके सीने से आ लगी। उसने धीरे-धीरे अपनी पलकों को उठाया और विवेक की आँखों में देखने लगी।

विवेक उसे बेहद प्यार से निहार रहा था। कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही, फिर उसने झुककर बड़े प्यार से मंजरी के माथे को चूम लिया।उस स्पर्श से मंजरी की आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं। वह कुछ पल उसी तरह विवेक की बाँहों में सिमटी रही, जैसे उसे दुनिया की किसी बात की फिक्र ही न हो।

विवेक ने धीमी आवाज में पूछा, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम जान के साथ आ रही हो?”मंजरी ने उसकी बाँहों में ही रहते हुए धीरे से कहा, “उसने अचानक ही मुझे अपने साथ चलने के लिए कहा था... इसलिए मैं बता नहीं पाई।”

विवेक ने उसके चेहरे को दोनों हाथों में थाम लिया और मुस्कुराते हुए उसकी आँखों में देखने लगा। फिर प्यार से उसके माथे को चूमा और बोला, “चलो...”
मंजरी ने मुस्कुराकर पूछा, “कहाँ?”
विवेक हँसते हुए बोला, “नहीं तो जान आज मेरी जान ले लेगी।”मंजरी उसकी बात सुनकर हँस पड़ी।

दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे राध्या के पीछे पार्टी हॉल की तरफ बढ़ गए।जैसे ही राध्या पार्टी हॉल के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुँची, एक पल के लिए जैसे वहाँ मौजूद लोगों की नजरें उसी पर ठहर गईं।

आज राध्या ने काले रंग की साड़ी पहन रखी थी। साड़ी की सादगी में भी उसका व्यक्तित्व इतना निखरकर सामने आ रहा था कि उसकी खूबसूरती पर नजर ठहर जाना स्वाभाविक था। उसका गोरा रंग काली साड़ी के साथ और भी निखर रहा था और खुले बाल उसके चेहरे की मासूमियत को और उभार रहे थे।

राध्या ने हॉल में प्रवेश किया और अपनी नजरें चारों तरफ दौड़ाने लगी। वह भीड़ में अपने परिवार को ढूँढ़ रही थी।लेकिन उसे क्या पता था कि उसके अंदर कदम रखते ही पार्टी में उसके नाम की चर्चाएँ शुरू हो चुकी थीं।

हॉल के एक कोने में खड़े कुछ लोग आपस में धीमी आवाज में बातें कर रहे थे।“यार, झा साहब की बेटी को देखा?”
“नहीं, कौन?”
“राध्या झा... बड़ी बेटी। खूबसूरती के साथ-साथ दिमाग भी बहुत तेज है। सुना है पढ़ाई में हमेशा टॉपर रही है।”इसी बीच पास खड़े युवराज सिंह चौहान के कानों में उनकी बातें पड़ीं।

उसने उत्सुकता से उनकी तरफ देखते हुए पूछा, “किसके बारे में बात हो रही है?”
उनमें से एक ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “अरे चौहान साहब, हम झा साहब की बड़ी बेटी की बात कर रहे हैं... राध्या झा की। सुना है जितनी खूबसूरत हैं, उतना ही तेज दिमाग भी पाया है उन्होंने।”

युवराज की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई।उसने अनायास ही अपनी कुर्सी से थोड़ा मुड़कर अपना चेहरा मुख्य प्रवेश द्वार की तरफ कर लिया।पूरे हॉल में इस वक्त एक ही नाम बार-बार सुनाई दे रहा था,राध्या झा और अब युवराज भी पहली बार उस लड़की को देखने के लिए उत्सुक था, जिसके आने से पूरी महफिल की निगाहें उसकी तरफ मुड़ गई थीं।

राध्या की कमर पर अचानक किसी का हाथ महसूस हुआ। उसने पलटकर उस तरफ देखा तो उसके चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई।
“चलें, जान?”राध्या ने हल्के से सिर हिलाया। “हम्म।”विवेक, राध्या और मंजरी साथ-साथ पार्टी हॉल के अंदर दाखिल हो गए।

उधर युवराज ने जैसे ही अपना चेहरा प्रवेश द्वार की तरफ घुमाया, उसे राध्या सिर्फ पीछे से दिखाई दी। उसका चेहरा वह देख नहीं पाया। काली साड़ी में उसकी खूबसूरत शख्सियत और लंबे खुले बालों की बस एक झलक ही युवराज की नजरों के सामने आई।उसकी उत्सुकता अब और बढ़ गई।

आखिर वह लड़की थी कौन, जिसके आने की चर्चा पूरे हॉल में हो रही थी?युवराज ने आसपास खड़े लोगों की तरफ देखा और कहा, “Excuse me, gentlemen.”इतना कहकर वह राध्या को ढूँढ़ने के लिए वहाँ से निकल पड़ा।

उधर राध्या अपने परिवार के पास पहुँच चुकी थी। जैसे ही परिवार की नजर अपनी लाडली बेटी पर पड़ी, कुछ पल के लिए सभी उसे देखते ही रह गए।मधु और विधि की आँखों में तो खुशी के आँसू तक आ गए।

विधि ने भावुक होकर कहा, “दीदी... देखो ना, राधू कितनी खूबसूरत लग रही है। हमारी बच्ची सच में बड़ी हो गई।”मधु ने भी नम आँखों से अपनी बेटी को देखते हुए धीरे से कहा, “हम्म... तुम ठीक कह रही हो छोटी।”

दोनों माँओं ने आगे बढ़कर राध्या की बलाएँ लीं और फिर उसकी नजर उतारते हुए उसके माथे पर काला टीका लगा दिया।राध्या मुस्कुराते हुए दोनों को देखती रही।तभी परिवार में से किसी ने हँसते हुए कहा,“भाभी, बस भी करो। झा परिवार की बेटी है... खूबसूरत तो होगी ही। आखिर भतीजी किसकी है?”

बात सुनते ही वहाँ खड़े सभी लोगों के चेहरों पर मुस्कान फैल गई।राध्या भी हल्के से मुस्कुरा दी। माहौल में एक पल के लिए वही पुराना पारिवारिक अपनापन उतर आया था।

“अरे मोहतरमाओं, अब छोड़ भी दो मेरी बच्ची को। उसे भी थोड़ी पार्टी एंजॉय करने दो।”
विपुल जी की बात सुनते ही सभी हँस पड़े। राध्या ने अपने पापा की तरफ देखकर हल्की-सी मुस्कान दी।

फिर उसने धीरे से कहा, “पापा, सच कहूँ तो मैं थोड़ी बोर हो रही हूँ। पता नहीं क्यों, यहाँ मुझे कुछ अजीब-सी घुटन महसूस हो रही है। थोड़ी देर रुकूँगी, फिर घर निकल जाऊँगी।”
विपुल जी ने बेटी के चेहरे को ध्यान से देखा। उसकी बात में उन्हें कुछ अजीब जरूर लगा, लेकिन उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किया।

“ठीक है बेटा। अगर मन नहीं लग रहा तो थोड़ी देर बाद चली जाना।”
“जी पापा।”विपुल जी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ रखा और फिर परिवार के बाकी लोगों के साथ पार्टी में आए दूसरे मेहमानों से मिलने चले गए।

कुछ देर बाद राध्या, रूही, मंजरी और सोनल एक टेबल के पास बैठ गईं। चारों आपस में बातें कर रही थीं और सामने चल रही पार्टी को देख रही थीं।
रूही ने हॉल में नजरें घुमाईं और अचानक उत्साहित होकर राध्या के करीब आ गई।
“दीदी जान... पार्टी तो बहुत बढ़िया है! और देखो ना, कितने सारे हैंडसम लड़के आए हैं।”
राध्या ने उसे घूरकर देखा।

रूही ने अपनी शरारती मुस्कान के साथ कहा, “देख लो दीदी जान, क्या पता इनमें से कोई आपको पसंद आ जाए।”राध्या ने आराम से कुर्सी पर टिकते हुए कहा, “हाँ जान, देख लेती हूँ... शायद कोई पसंद आ ही जाए।”

उसका जवाब सुनते ही रूही के चेहरे पर बड़ी-सी मुस्कान आ गई।लेकिन अगले ही पल राध्या ने उसे घूरते हुए कहा, “वैसे रूही के दिमाग के अगर दो फ्लोर खाली हैं, तो इसकी बातें समझ में आती हैं।”

एक पल की खामोशी के बाद चारों जोर से हँस पड़ीं।रूही ने मुँह फुला लिया।“हम्म्म... बहुत मजाक उड़ाओ मेरा! सोनल हँसते हुए बोलीं, “अच्छा बाबा, अब नाराज मत हो। रूही ने तुरंत राध्या की तरफ उंगली उठाई, “और आप दीदी जान! आप भी तो ऐसे ही बोल रही थीं। सोना दी, आप ही समझाइए इन्हें।”

राध्या मुस्कुराई और सिर हिलाते हुए बोली, “तुम लोग भी ना... तुम्हें पता है, मुझे इन सब चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

मंजरी ने उसकी तरफ देखते हुए हल्की मुस्कान दी। वह राध्या को अच्छी तरह जानती थी। उसे पता था कि राध्या जितनी खूबसूरत और समझदार थी, उतनी ही अपनी निजी जिंदगी को लेकर संजीदा भी।

राध्या ने सामने रखे अपने ग्लास की तरफ देखा और एक गहरी साँस ली।उसे फिर वही अजीब-सी घुटन महसूस हुई।उसे नहीं पता था कि इस बेचैनी की वजह क्या थी...लेकिन शायद उसका दिल किसी आने वाले तूफान को महसूस कर चुका था।

राध्या ने हल्की-सी मुस्कान के साथ सबकी तरफ देखते हुए कहा, “और मेरा मानना है कि मोहब्बत ढूँढ़ने से नहीं मिलती... मोहब्बत तो बस हो जाती है। और जब मोहब्बत सच्ची हो, तो शायद हर किसी की जिंदगी में उसका अपना हिस्सा जरूर आता है।”

राध्या की बात सुनकर कुछ पल के लिए सभी उसे देखते रहे, फिर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई।रूही ने तुरंत दोनों हाथ जोड़कर मजाकिया अंदाज में कहा, “धन्य हो देवी! आज तो बड़ी गहरी बातें कर रही हो।”उसकी बात सुनते ही सब जोर से हँस पड़े।

तभी अचानक म्यूजिक थोड़ा धीमा हुआ और पार्टी हॉल में अनाउंसमेंट हुई,“Ladies and gentlemen, the dance floor is now open. Please join us and enjoy the evening.”

अनाउंसमेंट होते ही पार्टी में जैसे एक नई रौनक आ गई। कपल्स एक-एक करके डांस फ्लोर की तरफ बढ़ने लगे।सोनल और अनील साथ में डांस फ्लोर पर चले गए।मंजरी भी विवेक के साथ जाने लगी, लेकिन तभी विवेक ने राध्या की तरफ देखा।
“तुम पहले चलो मेरे साथ... फिर मैं मंजरी को लेकर आता हूँ।”

राध्या ने तुरंत सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं भाई, आप जाओ। वैसे भी मेरा डांस करने का बिल्कुल मन नहीं है। मैं यहीं बैठकर एंजॉय कर लूँगी।”विवेक ने उसे कुछ पल गौर से देखा।
“पक्का?”राध्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ-हाँ भाई, पक्का। आप जाइए।”ठीक है जान... लेकिन कहीं जाना मत।“जी भाई।”

विवेक मंजरी के पास गया और उसका हाथ थामकर डांस फ्लोर की तरफ बढ़ गया।
राध्या वहीं अपनी कुर्सी पर बैठी उन्हें देखने लगी। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन उसके भीतर अब भी वही अनजानी बेचैनी मौजूद थी।

उसे क्या पता था कि कुछ ही पलों में उसकी यह अकेली बैठी शाम...किसी ऐसे शख्स की नजरों में आने वाली थी, जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देने वाला था।

डांस फ्लोर पर अब लगभग सभी पहुँच चुके थे। धीमी रोशनी और मधुर संगीत के बीच हर कोई अपने-अपने पार्टनर के साथ डांस कर रहा था। तभी माहौल में एक पुराना रोमांटिक गाना गूंजने लगा।
“दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके...
सबको हो रही है, खबर चुपके-चुपके...”

गाने की धुन के साथ विवेक और मंजरी भी एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए अपनी मोहब्बत के उन खूबसूरत पलों को महसूस कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने अब तक दुनिया से छुपाकर रखा था।

राध्या थोड़ी दूर एक टेबल के पास बैठी अपने परिवार को डांस करते हुए देख रही थी। कभी उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती, तो कभी वह चुपचाप सबको निहारने लगती।तभी अचानक उसके सामने किसी का हाथ आकर रुक गया।

“Miss Beautiful Lady... क्या मैं आपके साथ डांस कर सकता हूँ?”राध्या ने पहले उस हाथ को देखा और फिर धीरे-धीरे अपनी नजरें उठाईं।सामने एक अजनबी खड़ा था।उसने हल्की मुस्कान के साथ अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाए रखा था।

“युवराज सिंह चौहान, "राध्या ने उसकी तरफ कुछ पल गौर से देखा। फिर शिष्टाचारवश हल्की-सी मुस्कान दी।युवराज ने मुस्कुराते हुए कहा, “मिस ब्यूटीफुल...”राध्या ने तुरंत उसकी बात बीच में ही रोक दी।

“नो, नो... Mr. चौहान, लेट मी करेक्ट यू," उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा,“राध्या झा।”
युवराज के चेहरे पर मुस्कान और गहरी हो गई।ओके... ओके, मिस राध्या झा। तो क्या आप मेरे साथ डांस करेंगी?वह अब भी अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाए खड़ा था।

युवराज की नजरें राध्या के चेहरे पर टिकी थीं। मन ही मन वह उसकी खूबसूरती को देखकर खुद को रोक नहीं पा रहा था। “उफ़... क्या खूबसूरती पाई है तुमने। तुम्हें देखने के बाद तो कुछ और देखने का दिल ही नहीं कर रहा।”

राध्या उसकी नजरों को खामोशी से नोटिस कर रही थी। उसकी आँखों में उसे कुछ ऐसा दिखाई दे रहा था, जो उसे बिल्कुल सहज महसूस नहीं करा रहा था।उसने विनम्र लेकिन स्पष्ट स्वर में कहा,“Mr. चौहान, माफ कीजिएगा... मेरी डांस में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

युवराज ने अपना हाथ धीरे से नीचे कर लिया।लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान अभी भी कायम थी।“कोई बात नहीं, मिस राध्या...”राध्या ने बस हल्का-सा सिर हिलाया और अपना ध्यान फिर डांस फ्लोर की तरफ कर लिया।

वह यह नहीं जानती थी कि उसके सामने खड़ा यह आदमी उसके इस छोटे-से इंकार को इतनी आसानी से स्वीकार करने वाला नहीं था।युवराज को राध्या का इस तरह सीधे और बेझिझक इंकार करना अंदर ही अंदर बिल्कुल पसंद नहीं आया था।

उसकी मुस्कान के पीछे अब हल्की-सी खीझ साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन उसने अपने चेहरे के भावों को बदलने नहीं दिया।वह उसी सहज अंदाज में बोला, “आपको नहीं लगता, मिस राध्या, कि इस तरह कोई सभ्य पुरुष खुद आपके पास आकर आपसे डांस के लिए अनुरोध करे और आप उसे सीधे मना कर दें... तो थोड़ा असभ्य व्यवहार कहलाएगा?”

राध्या ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा।युवराज ने अपनी बात जारी रखी।
“वैसे आपको एक बात बता दूँ...” वह हल्की-सी मुस्कान के साथ बोला, “इस पार्टी में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं, जो मेरे साथ कुछ वक्त बिताने का मौका मिलने का इंतजार कर रही हैं।”
उसने राध्या की आँखों में देखते हुए कहा,

“और मैं उन सबको छोड़कर खुद आपके पास आया हूँ... और आप हैं कि मुझे ही इंकार कर रही हैं।”उसके स्वर में अब आत्मविश्वास से ज्यादा उसका अहंकार झलक रहा था।राध्या ने कुछ पल उसे शांत नजरों से देखा। उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न घबराहट... बस एक अजीब-सी स्थिरता थी।

फिर उसने बेहद सहजता से कहा,“Mr. चौहान, आपने मेरे पास आकर डांस के लिए पूछा, उसके लिए धन्यवाद। लेकिन सिर्फ इसलिए कि बाकी लोग आपके साथ डांस करना चाहते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि मुझे भी वही करना जरूरी है।”

वह हल्का-सा मुस्कुराई, “और जहाँ तक सभ्यता की बात है... अपनी पसंद बताना असभ्यता नहीं होती।”युवराज के चेहरे की मुस्कान एक पल के लिए फीकी पड़ गई।राध्या ने सामने बैठे अपने परिवार की तरफ देखा और फिर शांत स्वर में कहा,“उम्मीद है अब आप मेरी बात समझ गए होंगे।”

इतना कहकर वह वापस अपनी सीट पर बैठ गई।युवराज वहीं खड़ा उसे देखता रह गया।पहली बार किसी लड़की ने उसके रुतबे, नाम या आकर्षण से प्रभावित हुए बिना उसे इतनी आसानी से इंकार किया था और शायद...यही बात अब उसके भीतर राध्या को पाने की जिद पैदा करने वाली थी।

राध्या ने उसके चेहरे की तरफ देखा और हल्की-सी मुस्कान के साथ शांत स्वर में कहा,
“एक बात मैं आपको बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहती हूँ, Mr. चौहान। मैंने आपका कोई अपमान नहीं किया है। मैंने सिर्फ आपके प्रस्ताव को सीधे और साफ तरीके से मना किया है।”
युवराज कुछ कहने ही वाला था, लेकिन राध्या ने अपनी बात जारी रखी।

“रही बात पार्टी में आई हुई बाकी महिलाओं की... जो आपके साथ वक्त बिताने के लिए बेकरार हैं, तो हो सकती हैं। मुझे उससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुझे आपमें कोई दिलचस्पी नहीं है।”

उसकी आवाज में न रूखापन था, न घमंड। बस अपने फैसले को लेकर एक साफ आत्मविश्वास था।

“और अगर मेरी बातों से आपके अहं को ठेस पहुँची है, तो उसके लिए मैं कुछ नहीं कर सकती। क्योंकि वो मेरी गलती नहीं होगी... बल्कि शायद आपकी समझने की गलती होगी।”
युवराज की आँखें उस पर टिकी रहीं।

राध्या ने एक पल के लिए रुककर गहरी साँस ली और फिर कहा,“और हाँ... एक बात और कहना चाहूँगी। शायद पहली और आखिरी बार।”उसकी आँखों में अब पूरी गंभीरता उतर आई थी।

“मैं अपनी जिंदगी में कोई भी फैसला तब तक नहीं लेती, जब तक मेरा दिल और मेरा मन उसके लिए तैयार न हो। सिर्फ किसी का दिल रखने के लिए... या किसी की नजरों में खुद को बेहतर साबित करने के लिए... मैं उन चीजों से समझौता नहीं करती, जो मुझे पसंद नहीं हैं।”

उसने युवराज की आँखों में देखते हुए आखिरी बात कही,“इसलिए अगर मैं किसी चीज के लिए ‘ना’ कहती हूँ, तो उसका मतलब सिर्फ ‘ना’ होता है। उम्मीद है... अब आपको मेरी बात समझ आ गई होगी।”

इतना कहकर राध्या ने हल्की-सी मुस्कान दी और अपनी नजरें उससे हटा लीं।युवराज कुछ पल तक बिना कुछ बोले उसे देखता रहा।उसके लिए यह सिर्फ एक इंकार नहीं था।उसके अहं को पहली बार किसी ने इस तरह आईना दिखाया था और राध्या को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसकी यही साफगोई युवराज के मन में उसके लिए पैदा हुई दिलचस्पी को और गहरा कर चुकी थी।

Continue........

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