मधु जी ने राध्या को ऊपर से नीचे तक देखते हुए थोड़ी हैरानी से कहा, “राधू, ये क्या है? अभी तक तैयार क्यों नहीं हुई? हमें देर हो रही है।”
राध्या ने जल्दी से अपने गीले बालों को पीछे किया और मुस्कुराते हुए बोली, “माँ, आप सब निकलो। मैं बस आधे घंटे में तैयार होकर वेन्यू पर आप सभी से मिल जाऊँगी।”
मधु जी कुछ कहतीं, उससे पहले विवेक बीच में बोल पड़ा, “जान, मैं रुक जाता हूँ। हम दोनों साथ चलेंगे।”राध्या ने तुरंत सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं भाई, आप जाइए। ये बिजनेस पार्टी है और इस टेंडर के लिए आपका वहाँ होना बहुत जरूरी है। मैं ड्राइवर अंकल के साथ आराम से पहुँच जाऊँगी।”
विवेक ने कुछ पल उसे देखा, फिर उसकी बात मानते हुए बोला, “ठीक है... लेकिन वहाँ पहुँचकर मुझे कॉल जरूर करना।“पक्का,” राध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
विवेक ने फिर उसे हिदायत दी, “और सुन, अगर मुझे पहुँचने में देर हो गई तो तू अकेले कहीं मत जाना। मुझे फोन कर देना, मैं खुद आकर तुझे ले जाऊँगा। “जी भाई,” राध्या ने हँसते हुए कहा, “अब आप जाइए भी।”
आखिरकार परिवार के बाकी सभी लोग भी राध्या को जल्दी आने की हिदायत देते हुए घर से निकल गए।कुछ ही देर में घर का माहौल शांत हो गया।राध्या वापस अपने कमरे में चली गई। उसे भी अब जल्दी तैयार होना था।
करीब आधे घंटे बाद जब वह पूरी तरह तैयार होकर कमरे से बाहर आई, तो उसने आखिरी बार आईने में खुद को देखा। फिर अपना फोन उठाया और पार्टी के लिए निकल गई।गाड़ी में बैठते ही उसने सबसे पहले विवेक को फोन किया।
“भाई, मैं बीस मिनट में पहुँच जाऊँगी।”
दूसरी तरफ से विवेक की आवाज आई, “ठीक है जान। आराम से आना। “हम्म... ठीक है।”
राध्या ने फोन रख दिया।कुछ देर बाद उसे लगा कि शायद विवेक वेन्यू पर पहुँच चुका होगा। उसने दोबारा फोन मिलाया।
“कहाँ है तू?”उधर से किसी ने हँसते हुए जवाब दिया, “मैं नीचे हूँ। तुम आ जाओ।”राध्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “ओके... मैं पहुँच रही हूँ।”उसने फोन काट दिया और अपनी नजरें सड़क पर जमा दीं।
उसे अभी भी नहीं पता था कि जिस पार्टी में वह अपने परिवार के साथ कुछ खुशनुमा पल बिताने जा रही है...वहीं से उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी कहानी शुरू होने वाली थी।
राध्या पार्टी वेन्यू के बाहर पहुँची ही थी कि उसकी नजर सामने खड़ी एक लड़की पर पड़ी। उसने गाड़ी रुकवाई और जैसे ही बाहर निकली, वह लड़की भी उसकी तरफ बढ़ी।अगले ही पल दोनों एक-दूसरे से गले मिल गईं।
“अरे मेरी जान!” लड़की ने राध्या को खुद से अलग करते हुए उसे ऊपर से नीचे तक देखा और खुशी से बोली, “आज तू कितनी खूबसूरत लग रही है! तुझे किसी की नजर न लगे।”
कहते हुए उसने तुरंत अपनी आँखों से थोड़ा-सा काजल निकाला और प्यार से राध्या के कान के पीछे लगा दिया।
राध्या उसके इस अंदाज पर मुस्कुरा दी।और तुम भी आज बहुत खूबसूरत लग रही हो। वैसे...” उसने शरारत से उसे देखा, “भाई तुम्हें देखते ही अपने होश खोने वाले हैं।”
राध्या की बात सुनते ही वह लड़की शर्मा गई और हल्के से राध्या के हाथ पर मारते हुए बोली, “चुप कर ना!”
राध्या खिलखिलाकर हँस पड़ी।ये थी मंजरी! राध्या की बचपन की सबसे अच्छी दोस्त और विवेकानंद झा की वो मोहब्बत, जिसके बारे में अभी उनके परिवार में किसी को कुछ नहीं पता था।
मंजरी तेईस साल की थी। करीब पाँच फीट पाँच इंच लंबी, साँवले रंग और तीखे नैन-नक्श वाली। कमर तक आते उसके लंबे बाल और छरहरी काया उसकी खूबसूरती को और निखार देते थे। उसका साँवला रंग उसकी खूबसूरती को कम नहीं करता था, बल्कि उसके चेहरे पर एक अलग ही आकर्षण पैदा करता था।
लेकिन मंजरी की असली खूबसूरती उसके चेहरे में नहीं, बल्कि उसके दिल में थी।
वह बचपन से ही राध्या की सबसे करीबी दोस्त थी। दोनों के बीच ऐसा रिश्ता था, जिसमें दोस्ती से कहीं ज्यादा अपनापन था। राध्या के लिए मंजरी सिर्फ उसकी दोस्त नहीं, बल्कि उसकी जान थी।
मंजरी अनाथ थी। उसने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ अकेले सहकर सीखा था। पढ़ाई के साथ-साथ वह पार्ट-टाइम जॉब भी करती थी और अपनी जरूरतों के लिए खुद पर निर्भर रहती थी। अपनी मेहनत से अपनी जिंदगी बनाने की कोशिश कर रही थी,लेकिन इस सफर में अगर कोई उसके साथ हर कदम पर मजबूती से खड़ा रहा था, तो वो राध्या थी।
राध्या ने कभी मंजरी को उसके अकेलेपन का एहसास नहीं होने दिया था। उसकी पढ़ाई हो, कोई परेशानी हो या जिंदगी का कोई मुश्किल फैसला..राध्या हमेशा उसके साथ खड़ी रहती थी और शायद यही वजह थी कि मंजरी के लिए राध्या सिर्फ उसकी दोस्त नहीं थी।
राध्या ही उसका परिवार थी... उसका अपना थी।दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज की इस पार्टी में उनके सामने आने वाली खुशियों के साथ-साथ ऐसा तूफान भी खड़ा था, जो उनकी जिंदगी के कई रिश्तों को हमेशा के लिए बदल देने वाला था।
मंजरी और राध्या साथ-साथ पार्टी वेन्यू पर पहुँचीं। गाड़ी से उतरते ही राध्या ने अपना फोन निकाला और विवेक को कॉल किया।“भाई, हम पहुँच गए हैं।”दूसरी तरफ से विवेक की आवाज आई, “ठीक है, जान। मैं अभी आता हूँ।”
कुछ ही देर में विवेक सामने से आता दिखाई दिया। जैसे ही उसकी नजर राध्या पर पड़ी, वह कुछ पल के लिए वहीं ठहर गया। आज राध्या सचमुच बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके चेहरे की चमक और आँखों की मासूमियत उसे हमेशा से अलग बनाती थी।
विवेक उसके पास आते ही उसे बाँहों में भरकर बोला, “अरे मेरी जान! आज तो तू एकदम से बड़ी हो गई। मेरी जान को किसी की नजर न लगे। राध्या हँसते हुए उसके गले लगी रही,“भाई, बस भी करो...”
लेकिन तभी विवेक की नजर राध्या के पीछे खड़ी मंजरी पर गई।उसकी आँखों में जैसे अचानक एक अलग ही चमक आ गई।कुछ पल वह बस उसे देखता रह गया।फिर मुस्कुराकर बोला, “और तुम... तुम भी आज बेहद खूबसूरत लग रही हो।”
विवेक की बात सुनते ही मंजरी के गाल शर्म से लाल हो गए। उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ अपनी पलकें झुका लीं।विवेक भी उसे इस तरह शर्माते देखकर मुस्कुरा दिया।दोनों के बीच चल रही उस छोटी-सी खामोश बातचीत को राध्या ने भला कैसे नहीं समझना था?
वह अभी भी विवेक की बाँहों में थी। उसने अपनी आँखें घुमाईं और शरारती अंदाज में बोली,
“भाई... अगर मेरे कंधे के ऊपर से अपनी मोहब्बत का दीदार कर लिया हो, तो अब मुझे छोड़ भी दीजिए। मेरे बाल और ड्रेस दोनों खराब हो जाएँगे।”
विवेक जैसे अचानक नींद से जागा हो,“सॉरी... सॉरी जान! वो मैं...”राध्या खिलखिलाकर हँस पड़ी। कोई बात नहीं। आप दोनों मिल लीजिए अपनी मोहब्बत से। मैं आगे जाती हूँ।इतना कहकर राध्या मंजरी को आँख मारते हुए हँसती हुई आगे बढ़ गई।
मंजरी ने उसे रोकने के लिए धीमे से कहा, “राध्या...”लेकिन राध्या पीछे मुड़कर हाथ हिलाते हुए बोली,“एंजॉय करो!”
मंजरी ने शर्म से अपना चेहरा झुका लिया, जबकि विवेक के चेहरे पर ऐसी मुस्कान थी, जिसे वह बाकी दुनिया से छिपा सकता था...लेकिन राध्या से नहीं।
Continue........


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