राध्या जैसे ही चाइल्ड केयर सेंटर के सामने उतरी, उसने जल्दी से अपना बैग संभाला और अंदर चली गई। पूरे रास्ते उसके मन में बस आर्या का ख्याल घूम रहा था। सुबह से बेटी को अपने से दूर छोड़कर आई थी, इसलिए उसे देखते ही उसके चेहरे पर अपने आप सुकून उतर आया।
इधर अनिरुद्ध की आँखे छोटी हो गयी थी और उसकी नजरें लगातार चाइल्ड केयर बिल्डिंग पर थी। उसके दिमाग़ मै बहुत सवाल चल रहे थे। जिसका जबाब फिलहाल उसके पास नही था।राध्या जैसे ही अंदर पहुँची। उसकी नजर स्वाति पर पड़ी। स्वाति के पास ही आर्या बैठी थी। राध्या को देखते ही आर्या की आँखों में चमक आ गई।
“मम्मा...!”
राध्या ने मुस्कुराते हुए अपनी बाँहें उसकी तरफ बढ़ाईं और अगले ही पल आर्या उसकी गोद में थी।“मेरी बच्ची...” कहते हुए राध्या ने उसे अपने सीने से लगा लिया।आर्या ने भी अपनी दोनों नन्ही बाँहें राध्या के गले में डाल दीं और कभी उसके गाल पर तो कभी उसके माथे पर लगातार कई सारी किस्सियाँ करने लगी।
“मम्मा, आई मिस्ड यू।”
राध्या हँस पड़ी। उसने आर्या के माथे को चूमते हुए कहा, “मैंने भी अपनी princess को बहुत मिस किया।”आर्या फिर से उसके गाल पर किस करने लगी और राध्या के होंठों पर एक प्यारी-सी मुस्कान बनी रही।कुछ दूरी पर खड़ी स्वाति उन दोनों माँ-बेटी को देखकर मुस्कुरा रही थी।राध्या ने आर्या को थोड़ा संभालते हुए स्वाति की तरफ देखा और कहा, “Thank you so much, स्वाति।
सच में, तुमने आज मेरी बेटी का बहुत अच्छे से ख्याल रखा। मैं थोड़ी परेशान थी कि पहली बार इसे यहाँ छोड़कर जा रही हूँ, लेकिन तुमने मेरी tension ही खत्म कर दी।”स्वाति ने मुस्कुराकर कहा, “अरे इसमें thank you की क्या बात है? आर्या तो इतनी प्यारी बच्ची है कि इसके साथ समय कब निकल गया, पता ही नहीं चला।”
राध्या ने आर्या के बालों पर हाथ फेरते हुए कहा, “बस कल तक शायद इंटरव्यू का जवाब आ जाए। अगर job मिल गई तो उसके according मुझे कोई room देखना पड़ेगा। अभी तो समझ नहीं आ रहा कि कहाँ रहूँगी।”स्वाति कुछ पल उसे देखती रही। फिर अचानक उसने कहा, “राध्या, तुम मेरे साथ क्यों नहीं रह लेती?”राध्या ने हैरानी से उसकी तरफ देखा। मेरे साथ?“हाँ।” स्वाति मुस्कुराई। “जब से तुमसे मिली हूँ न, पता नहीं क्यों तुम्हारे साथ एक अलग-सा connection feel होता है।
ऐसा लगता है जैसे हम पहले से एक-दूसरे को जानते हों। मैं भी यहाँ अकेली ही रहती हूँ। तुम चाहो तो मेरे साथ रह सकती हो।”उसने आर्या की तरफ देखा और फिर मुस्कुराते हुए बोली, “और तुम्हारी इस छोटी-सी naughty princess के लिए भी तुम्हें ज्यादा परेशानी नहीं होगी। आखिर अब तो मैं भी इसकी आंटी बन ही गई हूँ।”राध्या कुछ पल चुप रही।
सुबह से जिस चिंता ने उसके मन को घेर रखा था, उसके बीच स्वाति की यह बात उसे पहली बार थोड़ी राहत दे रही थी। शिमला उसके लिए बिल्कुल नया शहर था और यहाँ उसका अपना कहने वाला कोई नहीं था। ऐसे में किसी का इस तरह अपनापन दिखाना उसके लिए छोटी बात नहीं थी।उसने स्वाति की तरफ देखा और हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई।तुम सच में बहुत अच्छी हो, स्वाति। स्वाति ने हँसते हुए कहा, “तो फिर मान गई ना? अब ज्यादा सोचना मत।”
राध्या ने स्वाति की बात सुनी तो कुछ पल के लिए चुप रही। उसके चेहरे पर हल्की-सी झिझक थी। फिर आर्या को अपनी गोद में थोड़ा संभालते हुए बोली, “नहीं स्वाति, मैं सब मैनेज कर लूँगी। अभी तो होटल में रुकी हुई हूँ। जैसे ही नौकरी पक्की होगी, उसके हिसाब से कोई अच्छा-सा कमरा देख लूँगी।”
स्वाति ने उसकी बात सुनकर हल्की-सी नाराज़गी जताते हुए कहा, “तुम मुझ पर भरोसा कर सकती हो, राध्या। चाहो तो मेरा आधार कार्ड रख लो।” कहते हुए वह मुस्कुरा दी। “मैं बिलकुल बुरा नहीं मानूँगी।
लेकिन एक बात मेरी भी मान लो... इतने छोटे बच्चे के साथ होटल में रहना सेफ नहीं है। तुम भी जानती हो कि आर्या के लिए होटल से ज्यादा अच्छा और सुरक्षित घर का माहौल रहेगा।”
राध्या कुछ कहने ही वाली थी कि स्वाति ने उसका हाथ पकड़ लिया और थोड़ी मायूसी से उसकी तरफ देखने लगी।“प्लीज़ राध्या... इतना तो मुझ पर भरोसा कर सकती हो ना?”स्वाति की आँखों में सच्चाई और अपनापन देखकर राध्या आखिरकार उसकी बात मान गई। उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ सिर हिला दिया।
“ठीक है... अगर तुम्हें इतनी ही परेशानी हो रही है तो मैं तुम्हारे साथ चलती हूँ।”राध्या के हामी भरते ही स्वाति के चेहरे पर खुशी आ गई। उसने तुरंत आर्या को राध्या की गोद से अपनी गोद में ले लिया और उसके दोनों गालों पर प्यार से किस करते हुए बोली, “चलो मेरी नई प्रिंसेस, पहले होटल चलते हैं। अपनी मम्मा का सामान लेते हैं और फिर सीधे मेरे घर। क्या कहती हो?”
आर्या ने अपनी बड़ी-बड़ी कत्थई आँखें गोल करते हुए स्वाति की तरफ देखा और मासूमियत से बोली, “ओके आंटी... आर्या आपके साथ चलेगी।”स्वाति ने तुरंत उसकी नाक पर हल्की-सी चपत लगाई और हँसते हुए बोली, “आंटी नहीं, मासी बुलाओ मुझे।”
आर्या ने कुछ पल उसे देखा, फिर खिलखिलाकर हँस पड़ी,“ओके... मासी!”स्वाति ने प्यार से उसके माथे को चूमा और राध्या की तरफ देखकर मुस्कुरा दी।स्वाति ने आर्या को अपनी गोद में संभालते हुए कुछ पल राध्या की तरफ देखा। उसके चेहरे पर अचानक आई मुस्कान धीरे-धीरे फीकी पड़ गई। वह कुछ कहने के लिए रुकी, जैसे अपने भीतर की कोई बात कहने की हिम्मत जुटा रही हो।
फिर उसने धीमे स्वर में कहा, “राध्या... मेरा अपना कोई परिवार नहीं है। जब से तुम्हें देखा है, पता नहीं क्यों तुम्हारे साथ एक बड़ी बहन जैसा अपनापन महसूस होता है। शायद इसी वजह से मैं तुमसे बार-बार अपने साथ रहने की जिद कर रही हूँ।”राध्या चुपचाप उसकी तरफ देखती रही।स्वाति ने अपनी भावनाओं को छिपाने की कोशिश करते हुए हल्की-सी मुस्कान दी और बोली, “क्या तुम मुझे अपनी छोटी बहन बना सकती हो?”
इतना कहते-कहते उसकी आँखों में नमी उतर आई। उसने तुरंत अपनी नजरें झुका लीं और धीमे से कहा, “अगर नहीं चाहती तो कोई बात नहीं... मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूँगी।”
राध्या से उसकी उदासी देखी नहीं गई। उसने बिना एक पल गंवाए आगे बढ़कर स्वाति को गले लगा लिया।
स्वाति अचानक मिले उस अपनापन से कुछ पल के लिए चौंक गई।राध्या ने उसे बाहों में भरते हुए भावुक आवाज़ में कहा, “पागल... इसके लिए इतना सोचने की क्या जरूरत थी? हाँ, आज से तुम मेरी छोटी बहन हो... और मेरी दोस्त भी। मेरा अपना तो आर्या है ही, लेकिन आज से तुम भी मेरी अपनी हो।”
स्वाति की आँखों से आँसू निकल पड़े। उसने भी राध्या को कसकर गले लगा लिया।दोनों एक-दूसरे को गले लगाए खड़ी थीं और उनके बीच आर्या बुरी तरह दब रही थी। कुछ सेकंड तक चुप रहने के बाद आर्या ने मासूमियत से दोनों को धक्का देने की कोशिश की और बोली, “मासी... मम्मा... आप दोनों के किस्सी-किस्सी में आर्या दब गई!”
उसकी बात सुनते ही दोनों एक-दूसरे से अलग हुईं और फिर एक साथ हँस पड़ीं।राध्या ने आर्या के गाल पर प्यार से किस करते हुए कहा, “ओके मेरी आरु बेबी, अब नहीं दबाएँगे तुम्हें।”स्वाति ने भी हँसते हुए कहा, “चलो मेरी नन्ही प्रिंसेस, अब घर चलते हैं।”आर्या ने खुशी से दोनों की तरफ देखा और सिर हिलाया।तीनों साथ-साथ चाइल्ड केयर सेंटर से बाहर निकल पड़ीं।
कुछ दूरी पर खड़ी गाड़ी में बैठे अनिरुद्ध की नजरें अब भी उनकी तरफ थीं। राहुल ने सामने का दृश्य देखा और फिर चुपचाप अपने बॉस की तरफ नजर घुमा ली।आज का दिन जितना राध्या की जिंदगी में कुछ नया लेकर आया था, शायद उतना ही अनिरुद्ध की जिंदगी में भी कुछ अनजाने सवाल छोड़ गया था।
राध्या स्वाति और आर्या के साथ वहाँ से जा चुकी थी, लेकिन अनिरुद्ध अभी भी अपनी गाड़ी में बैठा उसी दिशा में देख रहा था, जिधर वे तीनों गई थीं। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह गंभीरता और खामोशी थी। बाहर से देखकर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि उसके दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा है।
वह खुद भी शायद अपने भीतर उठ रहे उन अनजाने सवालों को समझने की कोशिश कर रहा था। राध्या के बारे में जितना उसने जाना था, उससे कहीं ज्यादा अब वह उसके बारे में जानना चाहता था। मगर क्यों, इसका जवाब फिलहाल सिर्फ़ अनिरुद्ध के पास था।राहुल काफी देर से अपने बॉस को खामोशी से देख रहा था। आखिरकार जब उससे अनिरुद्ध की यह चुप्पी और बर्दाश्त नहीं हुई तो उसने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “यार अनी, क्या चल रहा है तेरे दिमाग में? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुझे इस मिस झा से लव एट फर्स्ट साइट हो गया है? वैसे लड़की है भी बहुत प्यारी... और उसकी तो एक प्यारी-सी, क्यूट बेटी भी है।”
राहुल की बात पूरी होने से पहले ही अनिरुद्ध ने गर्दन घुमाकर उसे ऐसी घूरती हुई नजरों से देखा कि उसकी बाकी बात अपने आप उसके गले में अटक गई। अनिरुद्ध कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोल ही रहा था कि तभी उसके फोन की घंटी बज उठी।राहुल ने राहत की साँस ली और मन ही मन खुद से कहा, “बच गया बेटा राहुल... नहीं तो आज ये आदमखोर तुझे कच्चा चबा जाता।”
अनिरुद्ध ने फोन की स्क्रीन पर नजर डाली तो उसके बेटे का कॉल था। उसके चेहरे की सख्ती अचानक थोड़ी नरम पड़ गई। उसने कॉल रिसीव करते हुए कहा, “हैलो।”दूसरी तरफ से उसके बेटे की आवाज आई, “डैड, आप कहाँ हो? कब तक आओगे?”
अनिरुद्ध के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। “आ रहा हूँ, माय चैंप। थोड़ी देर में घर पहुँच जाऊँगा।”
बेटे से कुछ देर बात करने के बाद उसने कॉल खत्म किया और फोन वापस अपनी जेब में रख लिया। फिर उसने ड्राइवर की तरफ देखते हुए कहा, “घर चलो। “जी, सर।”
ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और उसे घर की तरफ मोड़ दिया। गाड़ी आगे बढ़ गई, लेकिन राहुल की नजरों में अब भी कुछ देर पहले का वही दृश्य घूम रहा था। वह अपने दोस्त को पिछले कई सालों से जानता था और इतना जरूर समझता था कि अनिरुद्ध बिना किसी वजह के किसी के पीछे नहीं जाता था।
आज वह पहली बार किसी लड़की के पीछे गया था और शायद राहुल को इस बात का अंदाज़ा था कि यह कहानी यहीं खत्म होने वाली नहीं थी।
होटल से अपना सामान लेने के बाद राध्या और स्वाति आखिरकार अपने नए ठिकाने पर पहुँच गईं। स्वाति का घर शहर की भीड़-भाड़ से थोड़ी दूर, शिमला की खूबसूरत वादियों के बीच एक शांत-सी जगह पर बना हुआ था।
घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें कदम रखते ही एक अलग ही तरह का सुकून महसूस होता था, जैसे बाहर की दुनिया की सारी भागदौड़ इस छोटे-से घर की चौखट पर आकर थम जाती हो।
घर के बाहर एक छोटा-सा खूबसूरत गार्डन था, जिसमें तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। गुलाब, गेंदा और कुछ छोटे-छोटे मौसमी फूल पूरे गार्डन को बेहद प्यारा बना रहे थे। फूलों के बीच रखी कुछ छोटी-सी सजावटी लाइट्स शाम होते ही शायद इस जगह को और भी खूबसूरत बना देती थीं। ठंडी हवा के साथ फूलों की हल्की-सी खुशबू पूरे माहौल को और सुकून भरा बना रही थी।
मुख्य दरवाजे के पास एक छोटी-सी गणपति जी की मूर्ति रखी थी, जिसके सामने एक छोटा-सा दीपक और कुछ ताजे फूल रखे हुए थे। राध्या की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, उसके चेहरे पर अपने आप हल्की-सी मुस्कान आ गई। उसने मन ही मन गणपति जी को प्रणाम किया और फिर स्वाति के साथ अंदर चली गई।
अंदर आते ही एक प्यारा-सा ड्रॉइंग रूम था। कमरे की दीवारों पर हल्के रंग थे और खिड़कियों पर लगे पीले पर्दे कमरे में एक गर्माहट-सी भर रहे थे। एक तरफ रखा लकड़ी का सोफा और उसके सामने रखी लकड़ी की सेंटर टेबल कमरे की सादगी को और खूबसूरत बना रही थी। कमरे में जरूरत से ज्यादा सजावट नहीं थी, लेकिन हर चीज अपनी जगह पर करीने से रखी हुई थी।
ड्रॉइंग रूम से लगा हुआ एक छोटा-सा किचन था, जिसमें रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर चीज मौजूद थी। किचन को देखकर साफ पता चलता था कि स्वाति अकेली रहती जरूर थी, लेकिन अपने घर को व्यवस्थित और साफ-सुथरा रखना उसे अच्छी तरह आता था।
घर में दो बेडरूम थे। दोनों कमरे बहुत बड़े नहीं थे, लेकिन आरामदायक थे। कमरों में मिडिल साइज के बेड, छोटी-सी अलमारी और जरूरत का बाकी सामान रखा हुआ था। खिड़कियों से बाहर शिमला की हरियाली दिखाई देती थी और ठंडी हवा कमरे के अंदर तक चली आती थी।
राध्या ने पूरे घर पर एक नजर डाली। छोटा-सा घर था, लेकिन उसमें दिखावा नहीं, बल्कि अपनापन था। हर कोने में एक ऐसी गर्माहट थी, जो उसे पिछले कुछ समय में कहीं महसूस नहीं हुई थी। उसके चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान आ गई।
तभी आर्या ने उत्साह से उसका हाथ पकड़कर पूछा, “मम्मा... मैं कहाँ रहूँगी?”स्वाति ने तुरंत झुककर आर्या के दोनों गाल अपनी हथेलियों में लिए और प्यार से बोली, “पूरा घर आपकी property है, मेरी princess। आप जहाँ चाहो रह सकती हो और जो मन करे कर सकती हो।”
आर्या की आँखें खुशी से चमक उठीं। उसने तुरंत बाहर गार्डन की तरफ देखा और चहकते हुए पूछा, “मैं गार्डन में जाकर खेल सकती हूँ?”“हाँ मेरी जान, बिल्कुल। तुम जाकर खेलो। तब तक मैं dinner की तैयारी करती हूँ।”
“Okay!”
आर्या खुशी से उछलती हुई अपना छोटा-सा बैग वहीं छोड़कर गार्डन की तरफ भाग गई।राध्या दरवाजे पर खड़ी उसे जाते हुए देखती रही। उसके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी। शायद पहली बार उसे लगा था कि शिमला उसके लिए सिर्फ एक अनजान शहर नहीं रहने वाला था। यहाँ उसे एक छोटा-सा घर मिल गया था... और शायद एक ऐसा रिश्ता भी, जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी।
राध्या ने घर में एक बार फिर नजर दौड़ाई। उसकी आँखों में एक अजीब-सा सुकून था, जैसे लंबे समय बाद उसे किसी जगह को देखकर अपनेपन का एहसास हुआ हो। उसने धीरे से स्वाति का हाथ अपने हाथों में लिया और भावुक होकर बोली, “स्वाति... पिछले दस सालों में मुझे ऐसा अपनापन और सुकून कहीं नहीं मिला। सच में, थैंक यू... मुझे सहारा देने के लिए।”
स्वाति ने उसकी बात सुनी तो अचानक उसका चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया। उसने राध्या की तरफ देखा और हल्के गुस्से से बोली, “बहन भी कहती हो और थैंक यू बोलकर फिर मुझे पराया भी कर दिया? अगर मैं तुम्हारी बहन हूँ तो फिर इन सब चीजों के लिए थैंक यू कैसा?”
इतना कहकर वह मुँह फेरकर खड़ी हो गई।राध्या कुछ पल उसे देखती रही, फिर उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। वह तुरंत स्वाति के सामने जाकर अपने दोनों कान पकड़ते हुए बोली, “ओके बाबा... गलती हो गई। प्रॉमिस, अब कभी ऐसी बात नहीं बोलूँगी। प्लीज़, गुस्सा मत करो।”
स्वाति ने कुछ पल तक गुस्सा बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन राध्या का मासूम चेहरा देखकर उसके होंठों पर आखिरकार मुस्कान आ ही गई। उसने आगे बढ़कर राध्या को गले लगा लिया और हँसते हुए बोली, “बस-बस, इतनी जल्दी पेट भर जाएगा क्या? अभी डिनर भी बनाना है।”राध्या भी हँस पड़ी और स्वाति के गले से अलग होते हुए सिर हिलाकर बोली, “हाँ मैडम, चलिए... डिनर बनाते हैं।”
दोनों मुस्कुराते हुए किचन की तरफ बढ़ गईं। बाहर गार्डन में आर्या खेल रही थी और घर के अंदर काफी समय बाद राध्या के जीवन में एक ऐसा अपनापन जन्म ले रहा था, जिसकी उसे शायद सबसे ज्यादा जरूरत थी।
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