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3. His ForEver Women

अनिरुद्ध ने नीचे पड़े राध्या के बाकी डॉक्यूमेंट्स उठाए और उन्हें उसके हाथ में थमा दिया। राध्या ने बिना उसकी तरफ देखे कागज संभालने शुरू ही किए थे कि अनिरुद्ध ने अचानक उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया।

राध्या इस अचानक हरकत के लिए तैयार नहीं थी। वह संभल भी नहीं पाई थी और उसके सीने से जा लगी अनिरुद्ध ने उसके गालों को दोनों हाथों से थाम लिया। उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था और आवाज़ में भी वही तल्खी थी।


“तुम्हें किस बात का इतना attitude है, जो तुम मुझे लगातार ignore कर रही हो?”
राध्या ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।अनिरुद्ध का गुस्सा कम होने के बजाय और बढ़ गया।“सड़क पर भी मैंने तुमसे बात करने की कोशिश की और तुम मुझे ignore करके चली गईं। यहाँ भी तुमसे कुछ कह रहा हूँ, लेकिन तुम्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। आखिर तुम्हारे अंदर इतनी अकड़ किस बात की है?”

उसने गुस्से में राध्या के दोनों गालों को थोड़ा दबाया। उसके शब्दों में नाराज़गी साफ थी, लेकिन उसकी पकड़ इतनी सख्त थी कि राध्या के चेहरे पर दर्द उभर आया।उसकी आँखों में अचानक नमी भर आई।

अनिरुद्ध की नजर जैसे ही उसकी आँखों पर पड़ी, उसका गुस्सा एक पल के लिए वहीं रुक गया। वह कुछ सेकंड तक उन नम आँखों को देखता रहा। जाने क्यों, राध्या की आँखों में आया दर्द उसे अच्छा नहीं लगा।

उसने तुरंत अपने हाथ पीछे खींच लिए।राध्या ने धीरे से अपने गालों पर हाथ रखा और उसे देखने लगी। उसके चेहरे पर दर्द के साथ-साथ नाराज़गी भी साफ दिखाई दे रही थी।अनिरुद्ध ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा, जैसे कुछ कहना चाहता हो, लेकिन फिर बिना कुछ कहे वहाँ से मुड़ गया।

वह तेज कदमों से आगे बढ़ गया, जबकि राध्या वहीं खड़ी उसे जाते हुए देखती रही। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कुछ ही मिनटों में यह अजनबी आदमी उससे इतनी बदतमीजी करने की हद तक आखिर क्यों पहुँच गया था।

राध्या ने कुछ कदम आगे बढ़ चुके अनिरुद्ध को देखते हुए आखिरकार धीमी, मगर साफ आवाज़ में कहा, “मुझे कोई शौक नहीं है कि मैं किसी की नजर में आऊँ। न ही मुझे ये पसंद है कि कोई मुझे देखे और मेरे बारे में कुछ सोचे।

मैं ऐसी नहीं हूँ जो भीड़ से अलग नजर आना चाहे। सच कहूँ तो मैं तो भीड़ का ही हिस्सा बनकर रहना चाहती हूँ... इतनी खामोशी से कि किसी की नजर मुझ पर पड़े ही नहीं।”

अनिरुद्ध के कदम वहीं नहीं रुके। वह बिना पीछे मुड़े उसकी बात सुनता रहा।राध्या ने अपनी बात जारी रखी, “और अगर आपको लगा कि मेरे अंदर बहुत attitude है, तो उसके लिए माफ कीजिएगा। मेरा आपको ignore करने का कोई इरादा नहीं था। बस... मैं उस वक्त अपने इंटरव्यू को लेकर परेशान थी और मुझे देर हो रही थी।”

उसकी आवाज़ में इस बार गुस्सा नहीं था। बस एक सच्चाई थी, जिसे वह बिना किसी सफाई या बहस के उसके सामने रखना चाहती थी।

अनिरुद्ध अब भी चुप था। चलते-चलते उसने अपनी इंडेक्स और मिडिल फिंगर से माथे पर हल्का-सा दबाव दिया। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह कोई भाव नहीं था, लेकिन राध्या की कही हुई बातें उसके दिमाग में बार-बार घूम रही थीं।


‘मैं भीड़ में खोकर रहना चाहती हूँ... ताकि किसी की नजर मुझ पर न पड़े।’अनिरुद्ध के लिए यह बात अजीब थी।आमतौर पर लोग उसकी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए हर संभव कोशिश करते थे। हर कोई चाहता था कि उसे देखा जाए, पहचाना जाए, उसकी तारीफ हो। लेकिन यह लड़की... वह तो खुद को लोगों की नजरों से बचाना चाहती थी।


आखिर क्यों?उसके मन में सवाल उठा, लेकिन उसने उस सवाल को ज्यादा देर तक सोचने की कोशिश नहीं की। उसके चेहरे पर अब भी वही भावहीनता थी, जिससे उसके मन में चल रही किसी भी हलचल को पढ़ पाना आसान नहीं था।

कुछ कदम आगे जाने के बाद न जाने क्यों उसने रुककर पीछे देखा।कॉरिडोर अब खाली था।राध्या वहाँ नहीं थी। वह अपनी बात कहकर जा चुकी थी।

अनिरुद्ध की नजर कुछ पल उसी खाली रास्ते पर टिकी रही। फिर उसने हल्के से सिर झटका, जैसे अपने मन में उठे सवालों को वहीं छोड़ देना चाहता हो, और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया।लेकिन इस बार उसके कदमों के साथ राध्या की कही हुई एक बात भी उसके साथ चल रही थी।

वह भीड़ में खोकर रहना चाहती थी और अनिरुद्ध को पहली बार किसी ऐसे इंसान को जानने की जिज्ञासा हुई थी, जो दुनिया की नजरों से बचना चाहता था।


राध्या जब इंटरव्यू हॉल में पहुँची तो वहाँ पहले से ही कई उम्मीदवार अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। किसी के हाथ में फाइल थी, कोई अपने डॉक्यूमेंट्स देख रहा था तो कोई आखिरी बार अपने जवाबों को मन ही मन दोहरा रहा था। उन सभी को देखकर राध्या के भीतर की घबराहट और बढ़ गई।

उसने एक नजर पूरे हॉल पर डाली और मन ही मन सोचा, इतने सारे उम्मीदवारों के बीच क्या मेरा सिलेक्शन हो पाएगा?उसके लिए यह सिर्फ एक नौकरी का इंटरव्यू नहीं था। उसे इस नौकरी की सख्त जरूरत थी।

आर्या के साथ एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए उसे एक स्थिर नौकरी चाहिए थी, ताकि वह अपनी बेटी को वह जिंदगी दे सके जिसकी वह हकदार थी। इसी उम्मीद के सहारे वह इतनी दूर आई थी और आज वह किसी भी कीमत पर इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी।

राध्या ने अपनी सोच को रोकते हुए एक खाली कुर्सी ढूँढ़ी और जाकर बैठ गई। उसने अपनी फाइल गोद में रखी और दोनों हाथों से उसे थाम लिया। फिर एक गहरी साँस लेकर खुद को शांत करने की कोशिश करने लगी।उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस वक्त कोई और भी उसे देख रहा था।

कॉलेज के ऑफिस में लगी स्क्रीन पर इंटरव्यू हॉल का पूरा दृश्य दिखाई दे रहा था और उस स्क्रीन के सामने बैठा अनिरुद्ध प्रताप काफी देर से सिर्फ राध्या को देख रहा था।न जाने क्यों उसकी नजर बार-बार उसी पर जाकर रुक रही थी।

वह बाकी उम्मीदवारों को भी देख सकता था, लेकिन उसका ध्यान सिर्फ राध्या पर था। उसकी नजरों में इस बार पहले वाली नाराज़गी नहीं थी, बल्कि एक अजीब-सी जिज्ञासा थी।न जाने क्यों इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे इसने खुद को पूरी दुनिया से छिपा रखा है...

अनिरुद्ध की नजर राध्या के शांत चेहरे पर टिक गई।जैसे इसके आसपास एक ऐसी दीवार है, जिसे इसने खुद खड़ा किया है। लेकिन क्यों ?उसने स्क्रीन पर राध्या को ध्यान से देखा। बाहर से वह बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रही थी, मगर उसकी आँखों में कुछ ऐसा था।

जो अनिरुद्ध को बार-बार अपनी तरफ खींच रहा था।कुछ तो है... जो इसकी आँखें कह रही हैं। कुछ ऐसा, जिसे ये किसी को बताना नहीं चाहती।

अनिरुद्ध खुद भी हैरान था कि वह एक अजनबी लड़की के बारे में इतनी देर से क्यों सोच रहा था। उसे आमतौर पर किसी के निजी जीवन को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं होती थी, लेकिन राध्या के मामले में न जाने क्यों उसके भीतर सवाल लगातार बढ़ते जा रहे थे।

वह अपने इन्हीं विचारों में इतना डूब गया कि उसे दरवाजे पर हुई दस्तक तक का ध्यान नहीं रहा।दोबारा दस्तक हुई तो अनिरुद्ध की नजर स्क्रीन से हटकर दरवाजे पर गई।

“May I come in, sir?”

अनिरुद्ध जैसे अचानक अपने ख्यालों से बाहर आया। उसने अपनी कुर्सी पर सीधा होते हुए चेहरे पर फिर वही गंभीरता ला दी,“Come in.”दरवाजा खुला और कॉलेज का एक कर्मचारी अंदर आया।“सर, इंटरव्यू पैनल तैयार है। बाकी मेंबर्स भी पहुँच चुके हैं।”अनिरुद्ध ने अपनी घड़ी पर नजर डाली और संक्षेप में कहा, “ठीक है। शुरू करते हैं।”

कर्मचारी के जाने के बाद अनिरुद्ध कुछ पल शांत बैठा रहा। फिर उसकी नजर अनायास एक बार फिर स्क्रीन पर चली गई।राध्या अब भी अपनी कुर्सी पर बैठी अपनी बारी का इंतजार कर रही थी।अनिरुद्ध ने कुछ पल उसे देखा और फिर स्क्रीन बंद कर दी।उसे क्या पता था कि आज जिस लड़की के बारे में वह खुद से इतने सवाल कर रहा है, कुछ ही देर बाद वही लड़की उसके सामने इंटरव्यू के लिए बैठने वाली है।

“सर, सभी कैंडिडेट्स आ चुके हैं।”अनिरुद्ध ने उसकी तरफ देखा और हल्के से अपना सिर हिला दिया। फिर उसने सामने रखी फाइल उठाई और इंटरव्यू शुरू करने का इशारा किया।

एक-एक करके सभी कैंडिडेट्स अंदर आते गए और अपना इंटरव्यू देते गए।

अनिरुद्ध हर कैंडिडेट से उसके subject, experience और qualification से जुड़े सवाल कर रहा था। उसका अंदाज हमेशा की तरह serious था, इसलिए उसके सामने बैठा हर कैंडिडेट थोड़ा nervous नजर आ रहा था।कुछ देर बाद अगली फाइल उसके सामने रखी गई।

अनिरुद्ध ने बिना ज्यादा ध्यान दिए फाइल उठाई, लेकिन जैसे ही उसकी नजर सबसे ऊपर लिखे नाम पर पड़ी, उसके हाथ एक पल के लिए रुक गए,“राध्या झा...”नाम पढ़ते ही उसके चेहरे पर एक हल्की-सी smile आ गई।

सुबह सड़क पर हुई मुलाकात और फिर कॉरिडोर में हुई उनकी बहस अचानक उसकी आँखों के सामने घूम गई। वही लड़की, जिसने सड़क पर भी उसे ignore किया था और यहाँ कॉरिडोर में भी उसकी बातों का कोई खास जवाब दिए बिना वहाँ से चली गई थी।

अनिरुद्ध ने फाइल खोलकर उसकी details पढ़नी शुरू कीं। जैसे ही उसकी नजर उसकी qualification पर पड़ी, उसकी भौंहें हल्की-सी ऊपर उठ गईं। Psychology में Ph.D.

उसने कुछ पल उस लाइन को देखा और फिर उसकी बाकी details पढ़ने लगा।

न जाने क्यों, राध्या को लेकर उसकी curiosity अब और बढ़ती जा रही थी। कुछ तो था उस लड़की में, जो उसे समझ नहीं आ रहा था। उसकी आँखों में छिपा हुआ वो दर्द, लोगों से खुद को दूर रखने की उसकी कोशिश और हर किसी की नजर से बचकर रहने की चाह... आखिर क्यों?

अनिरुद्ध ने फाइल बंद की और अपना फोन उठाकर किसी को call किया।

“एक लड़की की pic और उसकी details भेज रहा हूँ। मुझे इसके बारे में एक-एक information चाहिए। इसकी family, education, past, कहाँ रही है, कहाँ काम किया है... सब कुछ। मुझे तीन दिन के अंदर पूरी report चाहिए।”

दूसरी तरफ से कुछ कहा गया तो अनिरुद्ध ने बस इतना कहा, “मुझे किसी भी तरह की information miss नहीं चाहिए।"इतना कहकर उसने call काट दिया।

कुछ पल तक उसकी नजर सामने रखी राध्या की फाइल पर टिकी रही। फिर उसके होंठों पर वही हल्की-सी रहस्यमयी smile आई।“Welcome, Miss Jha...” उसने धीमे से कहा।

फिर उसने सामने खड़े लड़के की तरफ देखा और बोला, “Next candidate को भेजो।”

“जी, सर।”वह बाहर चला गया।अनिरुद्ध ने एक बार फिर राध्या की फाइल पर नजर डाली और फिर उसे बंद करके एक तरफ रख दिया। बाहर से उसका चेहरा हमेशा की तरह बिल्कुल normal और emotionless था।

लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ एक ही सवाल घूम रहा था।आखिर राध्या झा अपनी जिंदगी से ऐसा क्या छिपा रही थी, जिसे वह किसी के सामने नहीं आने देना चाहती थी?

राध्या को कुछ देर बाद इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। प्यून की आवाज़ सुनते ही उसने हल्के से अपना सिर हिलाया और अपने डॉक्यूमेंट्स वाला फोल्डर संभालते हुए उठ खड़ी हुई। उसके दिल की धड़कन पहले से थोड़ी तेज़ थी, फिर भी उसने खुद को संयमित किया और केबिन की तरफ बढ़ गई।

दरवाज़े के सामने पहुँचकर उसने एक पल के लिए गहरी साँस ली और फिर धीरे से नॉक किया।“May I come in, sir?”अंदर से आवाज़ आई, “Yes, come in, please.”

राध्या ने दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा। सामने रखी कुर्सी पर बैठने के बजाय उसकी नजर सबसे पहले उस कुर्सी पर गई, जिसकी पीठ उसकी तरफ थी। उसमें बैठा शख्स उसकी तरफ नहीं, बल्कि सामने की खिड़की की ओर देख रहा था, इसलिए राध्या को सिर्फ़ उसका पीछे का हिस्सा ही दिखाई दे रहा था।

उसने फोल्डर अपने हाथों में ठीक किया और विनम्रता से कहा, “Excuse me, sir...”

अगले ही पल वह कुर्सी धीरे-धीरे घूमी।राध्या की नजर जैसे ही सामने बैठे शख्स के चेहरे पर पड़ी, उसके कदम वहीं थम गए।अनिरुद्ध ने उसे देखते हुए होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान लाई और बेहद सहज अंदाज़ में कहा,“Yes, Miss Jha.”

राध्या की आँखें अचानक फैल गईं।उस चेहरे को देखते ही उसके दिमाग में कुछ घंटे पहले का वही दृश्य कौंध गया...शिमला की सड़क, BMW, उसके हाथ में रखी नोटों की गड्डियाँ... फिर कॉलेज का कॉरिडोर और वही कठोर आवाज़।

वह कुछ पल तक उसे अविश्वास से देखती रही,“आ... आप...!”अनिरुद्ध अपनी कुर्सी पर आराम से बैठा उसे देखता रहा। उसके चेहरे पर वही हल्की-सी मुस्कान थी, जैसे उसे पहले से पता हो कि राध्या उसे देखकर ऐसी ही प्रतिक्रिया देगी।

राध्या के हाथ अनजाने में अपने फोल्डर पर और कस गए।उसे अब समझ आया कि आज का इंटरव्यू उसके लिए इतना ‘खास’ क्यों बताया गया था।जिस शख्स से वह सुबह सड़क पर उलझ चुकी थी...जिसे उसने कॉरिडोर में भी नजरअंदाज करने की कोशिश की थी...आज उसी के सामने उसे नौकरी के लिए इंटरव्यू देना था।

राध्या की नजर जैसे ही अनिरुद्ध पर पड़ी, उसके चेहरे पर आई हैरानी साफ दिखाई देने लगी। कुछ पल तक वह बस उसे देखती रही, फिर अचानक उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मन ही मन ठाकुर जी से शिकायत करने लगी।

“क्या ठाकुर जी...  मेरी किस्मत की उलझनें कभी खत्म नहीं होंगी क्या? सुबह से एक के बाद एक मुसीबत सामने आ रही है और अब इस नौकरी के लिए भी आपने इन्हीं जनाब को मेरे सामने बैठा दिया। अब तो ये नौकरी मिलने से रही... कम से कम मेरे लिए नहीं तो आर्या के लिए ही सोच लेते।"

मन ही मन प्रार्थना करते हुए राध्या के चेहरे पर एक के बाद एक भाव आते-जाते रहे। कभी वह होंठों को हल्का-सा सिकोड़ती, कभी आँखें बंद कर लेती और कभी ऊपर देखते हुए ऐसे मुँह बनाती, जैसे सच में ठाकुर जी से नाराज़ होकर अपनी शिकायत दर्ज कर रही हो।

अनिरुद्ध सामने बैठा चुपचाप उसकी इन हरकतों को देख रहा था।सुबह से अब तक उसने राध्या को सिर्फ गुस्से में, परेशान या खुद को उससे दूर रखते हुए देखा था। लेकिन इस वक्त उसके चेहरे पर दिख रही यह मासूमियत बिल्कुल अलग थी।उसके होंठों पर अनायास ही मुस्कान आ गई।

न जाने क्यों, राध्या को इस तरह परेशान देखकर भी उसके मन में अजीब-सा सुकून उतर रहा था। वह बिना कुछ कहे उसे देखता रहा और पहली बार उसे महसूस हुआ कि इस लड़की का हर चेहरा उसके लिए किसी न किसी वजह से दिलचस्प होता जा रहा है।

राध्या अब भी अपनी ही दुनिया में खोई हुई थी। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि सामने बैठा अनिरुद्ध उसकी एक-एक हरकत देख रहा है।काफी देर तक जब राध्या ने उसकी तरफ नहीं देखा तो आखिरकार अनिरुद्ध ने अपनी खामोशी तोड़ी।

“मिस झा...”राध्या जैसे अचानक अपने ख्यालों से बाहर आई। उसने झट से उसकी तरफ देखा।“जी?”अनिरुद्ध ने अपने होंठों पर आई मुस्कान को दबाते हुए पूछा, “इंटरव्यू देने आई हैं या ठाकुर जी से मेरी शिकायत करने?”

राध्या की आँखें एकदम फैल गईं।एक पल के लिए उसे समझ ही नहीं आया कि वह कब से उसकी बातें और चेहरे के भाव देख रहा था।फिर उसके चेहरे पर हल्की-सी झेंप उतर आई और उसने नजरें चुराते हुए अपनी फाइल को ठीक करना शुरू कर दिया।

अनिरुद्ध ने उसकी तरफ देखते हुए थोड़ी सख्त आवाज़ में कहा, “मिस झा, लगता है आपको इंटरव्यू देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। आप तो शायद छत को देखने आई हैं, ताकि कम से कम तसल्ली कर सकें कि ये आप पर गिरने वाली तो नहीं है... क्यों, ठीक कहा ना मैंने?”

उसके शब्दों में हल्का-सा तंज था और चेहरे पर वही शरारती-सी मुस्कान।

राध्या का चेहरा झेंप से लाल हो गया। उसने खुद को संभालते हुए धीमे से कहा, “सॉरी सर... वो आपको अचानक सामने देखा तो बस...”वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाई और फिर थोड़ी झिझक के साथ बोली, “सर, क्या मैं बैठ सकती हूँ?”

अनिरुद्ध ने बिना कुछ कहे हल्के से सिर हिलाकर उसे बैठने का इशारा किया।राध्या सामने वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गई। उसने अपनी फाइल गोद में रखी और खुद को शांत करने की कोशिश करने लगी।

अनिरुद्ध कुछ पल तक उसकी फाइल देखता रहा, फिर नजर उठाकर राध्या की तरफ देखा।

“तो मिस झा... आप जमशेदपुर से हैं?”राध्या ने हल्के से सिर हिलाया। “जी, सर।”

अनिरुद्ध ने अपनी उँगलियाँ टेबल पर रखते हुए अगला सवाल किया, “फिर जमशेदपुर से इतनी दूर शिमला आने की वजह?

नौकरी के लिए इतनी दूर आने का फैसला क्यों किया? आपकी qualification और profile के हिसाब से तो आपको वहाँ भी अच्छी opportunity मिल सकती थी।”

सवाल सामान्य था, लेकिन अनिरुद्ध की नजरें जैसे उसके जवाब से ज्यादा उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थीं।राध्या ने एक पल के लिए अपनी नजरें झुका लीं।

उसके चेहरे पर आई हल्की-सी मुस्कान अचानक गायब हो गई। उसने अपनी उँगलियों को आपस में हल्का-सा दबाया, जैसे अनिरुद्ध के सवाल ने उसकी जिंदगी के किसी ऐसे हिस्से को छू लिया हो, जिसके बारे में वह किसी से बात नहीं करना चाहती थी।

राध्या ने अपने चेहरे पर सहजता लाते हुए संक्षेप में जवाब दिया, “सर, मुझे शिमला शुरू से ही पसंद रहा है। मैं काफी समय से किसी अच्छे मौके की तलाश में थी और जब इस नौकरी के बारे में पता चला तो मुझे लगा कि शायद यही वो मौका है जिसका मैं इंतजार कर रही थी।”

अनिरुद्ध कुछ पल उसे देखता रहा। फिर उसने अपनी नजर राध्या की फाइल पर डाली और अगला सवाल किया, “मिस झा, आपने अपनी फाइल में अपनी फैमिली के बारे में कुछ भी mention नहीं किया है।”

यह सवाल सुनते ही राध्या कुछ पल के लिए खामोश हो गई। उसके चेहरे पर आई सहजता कहीं खो गई और उसकी नजरें एक पल के लिए अपनी फाइल पर टिक गईं। फिर उसने खुद को संभालते हुए अनिरुद्ध की तरफ देखा।

“सर, जॉब मुझे करनी है... मेरी फैमिली को नहीं।”उसका जवाब शांत था, लेकिन उसमें एक ऐसी दृढ़ता थी कि अनिरुद्ध कुछ पल उसे देखता रह गया।

राध्या ने आगे कहा, “और मेरी बाकी सारी जरूरी information मेरे documents में है। आधार कार्ड से लेकर पैन कार्ड तक, जो भी जरूरी documents हैं, सब मैंने submit किए हैं। इससे ज्यादा मैं अपने बारे में कुछ बताना नहीं चाहती।”

अनिरुद्ध की आँखों में एक पल के लिए हल्की-सी चमक आई।वह उसके जवाब से नाराज नहीं हुआ, बल्कि उसके इस आत्मविश्वास ने उसकी curiosity और बढ़ा दी थी।

इसके बाद उसने राध्या से कई और सवाल किए। कभी उसकी qualification को लेकर, कभी उसके teaching experience को लेकर तो कभी psychology से जुड़े ऐसे सवाल पूछे, जिनका जवाब देना आसान नहीं था।

लेकिन राध्या ने उसके किसी भी सवाल के सामने अपनी घबराहट हावी नहीं होने दी। वह हर सवाल का जवाब बेहद शांत तरीके से और पूरे confidence के साथ देती रही। उसके जवाबों में न जरूरत से ज्यादा सफाई थी, न किसी तरह की बनावट।

अनिरुद्ध चुपचाप उसे observe करता रहा।इंटरव्यू खत्म होने के बाद उसने कुछ पल अपनी फाइल देखी और फिर राध्या की तरफ नजर उठाई।“Okay, Miss Jha. आप जा सकती हैं। आपको जल्द ही inform कर दिया जाएगा।”

राध्या ने हल्के से सिर हिलाया।“Thank you, sir.”वह अपनी फाइल उठाकर कुर्सी से खड़ी हुई और बिना कुछ कहे दरवाजे की तरफ बढ़ गई।

अनिरुद्ध की नजरें उसके जाते हुए कदमों पर कुछ पल टिकी रहीं।दरवाजा बंद हुआ तो उसने धीरे से अपनी कुर्सी पर पीछे सिर टिकाया।उसके मन में अब एक बात और साफ हो चुकी थी। राध्या झा जितना अपने बारे में बताती थी, उससे कहीं ज्यादा अपने बारे में छिपाती थी।

राध्या बाहर आते ही उसने अपनी घड़ी पर नजर डाली। शाम के चार बज चुके थे। इंटरव्यू में उम्मीद से ज्यादा समय लग गया था और अब उसे सबसे ज्यादा चिंता आर्या की हो रही थी। सुबह से बच्ची को चाइल्ड केयर में छोड़कर आई थी और अब उसका मन बार-बार उसी के पास जाने को बेचैन हो रहा था।

राध्या ने जल्दी से बाहर आकर सड़क किनारे ऑटो देखने शुरू किए, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी उसे एक भी ऑटो नहीं मिला। करीब पंद्रह मिनट बीत गए, तो आखिरकार उसने परेशान होकर अपना फोन निकाला और कैब बुक कर ली।

कुछ ही देर में कैब उसके सामने आकर रुकी। राध्या तुरंत उसमें बैठी और ड्राइवर को चाइल्ड केयर सेंटर का एड्रेस बताते हुए सीट पर टिक गई।उसे क्या पता था कि कॉलेज से निकलने के बाद से कोई और भी उसकी हर हरकत पर नजर रखे हुए था।

कुछ दूरी पर खड़ी अपनी कार में बैठा अनिरुद्ध काफी देर से राध्या को देख रहा था। उसने जैसे ही राध्या को कैब में बैठते देखा, ड्राइवर को उसकी कैब के पीछे चलने का इशारा किया।

“सर, कहाँ जाना है?”“उस कैब के पीछे चलो।”ड्राइवर ने बिना कोई सवाल किए गाड़ी आगे बढ़ा दी।

अनिरुद्ध की नजरें सामने जा रही कैब पर टिकी थीं। खुद उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह ऐसा क्यों कर रहा है। सुबह से यह लड़की उसके सामने बार-बार आ रही थी और अब, इंटरव्यू खत्म होने के बाद भी उसका ध्यान उससे हटने का नाम नहीं ले रहा था।उसके बगल में बैठा राहुल चुपचाप अपने बॉस को देख रहा था।

सुबह से वह अनिरुद्ध के व्यवहार में आए इस बदलाव को नोटिस कर रहा था। पिछले आठ-नौ सालों से वह उसे बेहद करीब से जानता था। अनिरुद्ध की जिंदगी में काम और परिवार के अलावा किसी और चीज के लिए शायद ही कभी कोई जगह रही हो। खासकर लड़कियों के मामले में तो वह हमेशा एक अजीब-सी दूरी बनाकर रखता था।

राहुल ने न जाने कितनी बार अपने बॉस को बड़ी से बड़ी मुश्किलों को बिना किसी भाव के संभालते देखा था। लेकिन आज सुबह से एक अनजान लड़की ने जैसे उसके पूरे routine को ही उलट-पुलट कर दिया था।

पहले सड़क पर हुई टक्कर...फिर कॉलेज के कॉरिडोर में हुई बहस...फिर इंटरव्यू के दौरान बार-बार राध्या को observe करना...और अब तो हद ही हो गई थी।

अनिरुद्ध प्रताप खुद अपनी गाड़ी से उसकी कैब के पीछे जा रहा था।राहुल ने कुछ पल सामने देखते हुए अपने होंठ भींचे, ताकि उसके चेहरे पर आती मुस्कान अनिरुद्ध की नजर में न आ जाए।

मन ही मन उसने सोचा, आखिर इस लड़की में ऐसा क्या है, जो पिछले इतने सालों में कोई नहीं कर पाया और इसने एक ही दिन में कर दिया?

राहुल सिर्फ अनिरुद्ध का assistant नहीं था। वह उन चुनिंदा लोगों में से था, जिन पर अनिरुद्ध आँख बंद करके भरोसा करता था। दोनों का रिश्ता सिर्फ बॉस और असिस्टेंट तक सीमित नहीं था। उनके बीच ऐसी समझ थी, जहाँ कई बार एक को कुछ कहने की जरूरत भी नहीं पड़ती थी और दूसरा उसकी बात समझ जाता था।

लेकिन राहुल की अपनी जिंदगी भी उतनी सीधी नहीं थी, जितनी ऑफिस में नजर आती थी।

उसकी एक ऐसी पहचान थी, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे और शायद यही वजह थी कि वह अनिरुद्ध की जिंदगी के उन हिस्सों से भी वाकिफ था, जिनसे बाकी दुनिया पूरी तरह अनजान थी।

राहुल ने एक बार फिर अनिरुद्ध की तरफ देखा। अनिरुद्ध अब भी सामने जाती कैब को देख रहा था।आखिरकार राहुल खुद को रोक नहीं पाया, " सर ! “हम्म? “एक बात पूछूँ?”

अनिरुद्ध ने उसकी तरफ देखा। “पूछो।”

राहुल ने सामने सड़क पर नजर डालते हुए बड़ी मासूमियत से कहा, “हम इस कैब के पीछे कब तक चलेंगे?”अनिरुद्ध की आँखें हल्की-सी सिकुड़ गईं।“जहाँ तक मुझे जाना है।”

राहुल ने अपनी मुस्कान दबाते हुए सिर हिला दिया,“जी, सर।”

लेकिन मन ही मन उसने बस इतना कहा,कुछ तो बहुत गड़बड़ है, बॉस... और इस बार मामला सिर्फ एक लड़की का नहीं लगता।

Continue......

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